कुलपति का संदेश

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Shri R. N. Choubey, I.A.S

Secretary, Government of India, Ministry of Civil Aviation

भारतीय नागर विमानन क्षेत्र ने वर्ष 2016 सकल घरेलू उत्पाद में 72 अरब अमरीकी डॉलर का योगदान दिया था और यह दुनिया भर में सबसे तेज़ी से बढ़ते विमानन क्षेत्रों में से एक रहा है। जनवरी-जुलाई 2017 के दौरान घरेलू एयरलाइंस द्वारा वहन किए गए यात्रियों की संख्‍या‍ 6.57 करोड़ थी, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 5.61 करोड़ यात्रियों की संख्या की तुलना में 17.18% अधिक थी। 900 से अधिक एयरक्राफ्ट की ऑर्डर बुकिंग‍ के साथ (विश्‍व में यू.एस.ए. और चीन के बाद तीसरा स्‍थान) यह किसी प्रमुख विमानन बाजार की सेवा में ऑर्डर पर एयरक्राफ्ट का सबसे बड़़ा अनुपात है और य‍ह प्रगति आगे आने वाले वर्षों में भी जारी रहेगी।

पैरा यू.डी.ए.एन. (उड़ान) योजना को लागू करने के साथ राष्ट्रीय नागर विमानन नीति 2016 के माध्‍यम से किए गए अन्‍य प्रयासों की विस्‍तृत पहुंच ने अति आवश्यक संरचनात्मक मदद, स्वचालित प्रणाली और उद्योग में मानवीय दिलचस्‍पी बढ़ाई है। सहायक गतिशीलता से संबंधित उत्पादों की बिक्री के माध्यम से नए राजस्व का प्रबंध किया गया है और ग्राहक सेवाएं मुख्‍य हितधारकों के लिए व्यापार मॉडल व्यवहार्यता में सुधार कर रही हैं।

चूंकि आज विमानन एक उच्च तकनीक और कौशल उन्मुख क्षेत्र है, इसलिए पेशेवरों को कुशल बनाना अंत्‍यत आवश्‍यक हो गया है। विमानन क्षेत्र में विकास करने और उसे बनाए रखने के लिए महत्‍वपूर्ण रूप से आवश्‍यक कुशलताओं में निपुण पेशेवर अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण हैं। विमानन क्षेत्र में प्रगति और उत्कृष्टता को सुविधाजनक बनाने हेतु आवश्‍यक ज्ञान के विकास और प्रसार करने की दिशा में समर्पित राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय का गठन एक उचित कदम है। भारत के विमानन क्षेत्र की विकास यात्रा को गढ़ने हेतु विश्‍वविद्यालय को उत्‍प्रेरक के रूप में स्‍थापित किया गया है।

राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय और भारत सरकार नागर विमानन उद्योग में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मैं भारत में विमानन शिक्षा के क्षेत्र में इस विश्‍वविद्यालय को अग्रणी देखना चाहता हूं तथा इन सभी प्रयासों के लिए अपनी शुभकामनाएं देता हूं।